How to choose your friends wisely अपने मित्रो बुद्धिमानी से चुनें
जय मसीह की प्रियों !
प्रियों आज हम जिस विषय को देखने वाले है वह है हम कैसे अपने मित्रो को बुद्धिमानी से चुन सकते है और हमे क्योँ मित्र को बुद्धिमानी से चुना चाहिए और बाइबिल क्या बताती में दोस्ती के बारे में वह देखेंगे ।

विशेषज्ञों का मानना है की अगले पांच सालों में आप क्या बनेंगे, यह कई कारको पर निर्भर करता है ; एक करक आपके मित्र भी है । कुछ विशेषज्ञ का कहना है की आप हमे अपने मित्रो दिखाओ और हम बता देंगे की आप कैसे है ।
दोस्ती जीवन का सबसे सुंदर रिश्ता होती है, लेकिन हर रिश्ता हमारे जीवन में सकारात्मक प्रभाव नहीं डालता। इसीलिए यह जरूरी है कि हम अपने दोस्तों का चुनाव सोच-समझकर करें। अच्छे दोस्त वही होते हैं जो हमें सही राह दिखाएं, कठिन समय में साथ खड़े रहें और हमें हमारे लक्ष्यों तक पहुँचने के लिए प्रेरित करें।
हमारी दोस्ती महत्वपूर्ण है । ये हमारे जीवन की दिशा तय करती है । ये तय करती है की हम अपना जीवन कैसे जीते है , सचेतन रूप से या अचेतन रूप से और इसलिए हमें इस बात का ध्यान देना चाहिए की हमे कोसके साथ घूमते है और किसे अपना दोस्त कहते है ।
बाइबल हमें अपने दोस्तों को बुद्धिमानी से चुनने की सलाह देती है। नीतिवचन 13:20 में लिखा है, “बुद्धिमानों की संगति कर, तब तू भी बुद्धिमान हो जाएगा, परन्तु मूर्खों का साथी नाश हो जाएगा।” हम नीतिवचन 9:10 में देखते है कि “प्रभु का भय मानना बुद्धि की शुरुआत है ।” इसलिए, जब परमेश्वर बाइबल के माध्यम से कहते हैं कि जब हम बुद्धिमानों के साथ चलेंगे, तो हम बुद्धिमान बनेंगे; तो वह कह रहे हैं कि हमें ऐसे दोस्त चुनने चाहिए जो उनका भय मानते हों और जो उनके वचन के अनुसार चलते हों, यानी आज्ञाकारिता में चलते हों। वह चाहते हैं कि हमारे दोस्त ऐसे लोग हों: जो हमें उनसे दूर ले जाने के बजाय उनके करीब आने के लिए प्रेरित करें।
प्रार्थना में परमेश्वर से पूछे
परमेश्वर से ईश्वरीय मित्रों के लिए प्रार्थना करें, या ऐसे लोगों के लिए जो उसकी इच्छा के अनुसार चलने के लिए दृढ़ हैं। जब आप इस प्रकार प्रार्थना करते हैं, तो विश्वास रखें कि परमेश्वर उत्तर देंगे और आपको ईश्वरीय मित्र देंगे। वह कहते हैं कि जब हम उनकी इच्छा के अनुसार कुछ भी माँगते हैं, तो वह हमारी सुनते हैं। प्रतिक्रिया के लिए उनका धन्यवाद करें।
बाइबिल दोस्ती के बारे में क्या बताती है
“धर्मी अपने पडोसी की अगुवाई करता है, लेकिन दुष्ट लोग अपनी ही चाल के कारण भटक जाते है।” (नीतिवचन 12:26)
हम यंहा पर देखते है की जो धर्मी व्यक्ति होता है वह मित्र की अगुवाई करता है लेकिन जो दुष्ट होता है वह अपनी ही चल के कारण भटक जाता है । हमारा मित्र अगर धर्मी होगा तो वह हमारी अगुवाई कर सकता है लेकिन हमारा मित्र दुष्ट होगा तो वह हमें भी भटका देगा ।
” मित्रो के बढ़ने से तो नाश होता है , परन्तु ऐसा मित्र होता है जो भाई से भी अधिक मिला रहता है । ” (नीतिवचन 12:26)
बाइबिल के दृष्टिकोण से दोस्त चुनने के कारण
“बुरी संगति अच्छे चरित्र को बिगाड़ देती है।” ( 1 कोरिंथियों 15:33 )
मित्र हमारे मन, सोच और चरित्र को आकार देते हैं। गलत संगति का प्रभाव खराब चरित्र या गलत दिशा में जा सकता है। परमेश्वर चाहते हैं कि हम केवल सतही संबंध न बनायें, बल्कि ऐसे मित्र चुनें जो हमारे विश्वास को मजबूत करें और अच्छे कामों के लिए प्रेरित करें। यीशु ने स्वयं अपने शिष्यों को विचारपूर्वक चुना, जिन्होंने उसके कार्य में साथ दिया और सच्ची मित्रता का उदाहरण प्रस्तुत किया।
मित्रता के गुण
” मित्र सब समयों में प्रेम रखता है और विपत्ति के दिन भाई बन जाता है । ” (नीतिवचन 17:17)
हम यंहा पर देखा सकते ही की जो सच्चा मित्र होता है वह हमेशा साथ रहता है वह जब हमारे अच्छे दिन हो तब हमरे साथ रहता और जब हमारे बुरे दिन हो तब भी हमारे साथ रहता है ।
अच्छे मित्र एक-दूसरे को सुधारने, प्रोत्साहित करने और संगति में बने रहने में मदद करते हैं –
” जैसे लोहा लोहे को चमका देता है, वैसा ही मनुष्य का मुख अपने मित्र की संगति में से चमकदार हो जाता है । “ (नीतिवचन 27:17)
परमेश्वर हमे जल्दी से क्रोध करने वाले व्यक्ति से दोस्ती करने से मन करता है –
” क्रोधी मनुष्य का मित्र न होना , और झट क्रोध करने वाले के संग न चलना , कहीं ऐसा न हो की तू उसकी चाल सीखे और तेरा प्राण फंदे में फंस जाए । “ (नीतिवचन 22:24-25)
प्रियों इस आर्टिकल से प्रभु ने आपसे बात की है और आप आशीषित हुवे है तो अपने दोस्तों और रिस्तेदारो से जरूर शेयर कीजियेगा ताकि वो लोग भी आशीषित हो और प्रभु यीशु को बड़ी महिमा मिले ।
God Bless You……..