pavitra aatma kaun hai पवित्र आत्मा कौन है
केवल एक परमेश्वर है और वो सदैव ‘ परमेश्वर पिता ‘, ‘ परमेश्वर पुत्र ‘ और ‘ परमेश्वर पवित्र आत्मा ‘ में विद्यमान रहता है । अतः पवित्र आत्मा पर विचार करने से मनुष्य का ध्यान त्रिएकत्व पर जाता है और फिर यह यीशु मसीह के जीवन और सेवाओं पर जाता है। यद्पि प्रकटीकरण मसीह में सर्वोच्च स्थान पता है और फिर भी इसका स्रोत ‘ पुराना नियम ‘ में मिलता है ।

‘ पुराना नियम ‘ में जब कुछ लोग परमेश्वर की शक्ति के महान काम देखते थे तो वे इसे इब्रानी शब्द ‘ roo-akh ( रूआख ) ‘ की शक्ति का कार्य कहते थे । इब्रानी शब्द ‘roo-akh’ का अर्थ ‘ हवा (wind) ‘ ( गिनती 11:31, निर्गमन 10:13 ) , ‘ श्वास (breath) ‘ ( अय्यूब 12:10, अय्यूब 33:4 ), ‘ आत्मा ( spirit ) ‘ ( न्यायियों 6:34, 1 शमूएल 16:14, 1 राजा 18:12 ) होता है।
पुराने नियम में किसी निश्चत अवसर पर परमेश्वर का आत्मा या परमेश्वर की शक्ति उसके चुने हुए लोगों पर विशेष उद्देश्य से आती थी। इसका परिणाम जीतने वाले अगुवे ( न्यायियों 14:6,9 ; 15:14; 16:20) या विशेष कार्यकुशलता ( निर्गमन 31:3-5) हो सकता था। वे नबी जो परमेश्वर की ओर से सन्देश ग्रहण करके लोगों तक पहुंचाते थे वे परमेश्वर के इसी आत्मा के द्वारा प्रेरणा पाकर कार्य करते थे ( 2 शमुएल 23:20; 2 इतिहास 24:20; नहेमायाह 9:30; यशायाह 61:1; जक. 7:12)
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परमेश्वर ने प्रतिज्ञा की कि वह दिन आने आने वाला है जबकि न केवल कुछ चुने हुए लोग परन्तु परमेश्वर के सब लोग चाहे वे किसी भी स्तर , आयु के स्त्री अथवा पुरुष क्यों न हो उन पर परमेश्वर का आत्मा उण्डेला जाएगा ( 2:28-29)
“उन बातों के बाद मैं सब प्राणियों पर अपना आत्मा उण्डेलूंगा; तुम्हारे बेटे-बेटियां भविष्यद्वाणी करेंगी, और तुम्हारे पुरनिये स्वप्न देखेंगे, और तुम्हारे जवान दर्शन देखेंगे। तुम्हारे दास और दासियों पर भी मैं उन दिनों में अपना आत्मा उण्डेलूंगा॥ “ ( योएल 2:28-29)
और वह व्यक्ति जिस पर परमेश्वर का आत्मा विशेष रूप से उतरेगा वही मसीह होगा ( यशायाह 11:1-5)
पुराने नियम के बाद नया नियम में भी हम पवित्र आत्मा को देख सकते हैं । लेकिन पुराने नियम में पवित्र आत्मा कुछ उद्देश्य से आता था वह पुरा करने के बाद वापस चला जाता था। लेकिन नाया नियम में पवित्र आत्मा हमेशा हमारे अंदर बना रहता है । प्रभु यीशु के स्वर्ग जाने से पहले यीशु ने आज्ञा दी की पिता की प्रतिज्ञा की बाट जोहते रहना ।
ओर उन से मिलकर उन्हें आज्ञा दी, कि यरूशलेम को न छोड़ो, परन्तु पिता की उस प्रतिज्ञा के पूरे होने की बाट जोहते रहो, जिस की चर्चा तुम मुझ से सुन चुके हो। क्यों कि यूहन्ना ने तो पानी में बपतिस्मा दिया है परन्तु थोड़े दिनों के बाद तुम पवित्रात्मा से बपतिस्मा पाओगे। ( प्रेरितों के काम 1:4 )
उसके बाद हम पिन्तेकुस्त के दिन देखते हे कि पवित्र आत्मा स्वर्ग से उतरा और सब लोग जो उस घर में मोजुद थे वे पवित्र आत्मा से भर गए।
“जब पिन्तेकुस का दिन आया, तो वे सब एक जगह इकट्ठे थे।और एकाएक आकाश से बड़ी आंधी की सी सनसनाहट का शब्द हुआ, और उस से सारा घर जहां वे बैठे थे, गूंज गया। और उन्हें आग की सी जीभें फटती हुई दिखाई दीं; और उन में से हर एक पर आ ठहरीं। और वे सब पवित्र आत्मा से भर गए, और जिस प्रकार आत्मा ने उन्हें बोलने की सामर्थ दी, वे अन्य अन्य भाषा बोलने लगे॥ ” ( प्रेरितों के काम 2:1-4)
प्रिय अभी तक हमने जाना की पवित्र आत्मा है अब हम जानेगे की वह कौन है और कैसा है तो चलिए जानते हैं की पवित्र आत्मा कोन है
पवित्र आत्मा एक व्यक्ति है
हम बाइबल से देखते हैं की पवित्र आत्मा बुद्धि , भावनायें और इच्छाशक्ति है। बाइबल में हम देखते हैं वे कार्य भी प्रदान करता है जो एक व्यक्ति करता है पवित्र आत्मा कोई शक्ति नहीं बल्कि एक व्यक्ति है। हम बाइबल में देखते हैं की वे जब उपवास और सेवा कर रहे थे तब पवित्र आत्मा ने कहा –
“जब वे उपवास सहित प्रभु की उपासना कर रहे था, तो पवित्र आत्मा ने कहा; मेरे निमित्त बरनबास और शाऊल को उस काम के लिये अलग करो जिस के लिये मैं ने उन्हें बुलाया है।” ( प्रेरितों के काम 13:2)
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वह मध्यथा भी करता है –
“इसी रीति से आत्मा भी हमारी दुर्बलता में सहायता करता है, क्योंकि हम नहीं जानते, कि प्रार्थना किस रीति से करना चाहिए; परन्तु आत्मा आप ही ऐसी आहें भर भरकर जो बयान से बाहर है, हमारे लिये बिनती करता है।” ( रोमियो 8:26 )
वह गवाही देता है –
” परन्तु जब वह सहायक आएगा, जिसे मैं तुम्हारे पास पिता की ओर से भेजूंगा, अर्थात सत्य का आत्मा जो पिता की ओर से निकलता है, तो वह मेरी गवाही देगा। “ ( यूहन्ना 15:26 )
वह अगुवाई करता है
” तब आत्मा ने फिलेप्पुस से कहा, निकट जाकर इस रथ के साथ हो ले। “ ( प्रेरितों के काम 8:29 )
वह आज्ञा देता है
” और वे फ्रूगिया और गलतिया देशों में से होकर गए, और पवित्र आत्मा ने उन्हें ऐशिया में वचन सुनाने से मना किया।और उन्होंने मूसिया के निकट पहुंचकर, बितूनिया में जाना चाहा; परन्तु यीशु के आत्मा ने उन्हें जाने न दिया। “ ( प्रेरितों के काम 16:6-7 )
वह मार्गदर्शन करता है
” परन्तु जब वह अर्थात सत्य का आत्मा आएगा, तो तुम्हें सब सत्य का मार्ग बताएगा, क्योंकि वह अपनी ओर से न कहेगा, परन्तु जो कुछ सुनेगा, वही कहेगा, और आनेवाली बातें तुम्हें बताएगा। “ ( यूहन्ना 16:13 )
वह नियुक्त करता है
” इसलिये अपनी और पूरे झुंड की चौकसी करो; जिस से पवित्र आत्मा ने तुम्हें अध्यक्ष ठहराया है; कि तुम परमेश्वर की कलीसिया की रखवाली करो, जिसे उस ने अपने लोहू से मोल लिया है। “ ( प्रेरितों के काम 20:28 )
उसकी निन्दा की जा सकती है –
” इसलिये मैं तुम से कहता हूं, कि मनुष्य का सब प्रकार का पाप और निन्दा क्षमा की जाएगी, पर आत्मा की निन्दा क्षमा न की जाएगी। जो कोई मनुष्य के पुत्र के विरोध में कोई बात कहेगा, उसका यह अपराध क्षमा किया जाएगा, परन्तु जो कोई पवित्र-आत्मा के विरोध में कुछ कहेगा, उसका अपराध न तो इस लोक में और न पर लोक में क्षमा किया जाएगा। “ ( मत्ती 12:31-32 )
उसे दु:खी किया जा सकता है –
और परमेश्वर के पवित्र आत्मा को शोकित मत करो, जिस से तुम पर छुटकारे के दिन के लिये छाप दी गई है। “ ( इफिसियों 4:30 )
हमने जिस भावनाओं और कार्य कि सुचि दी वह एक व्यक्ति के गुण है। पवित्र आत्मा कोई शक्ति नहीं बल्कि व्यक्ति है और उसमें व्यक्ति के सभी गुण विद्यमान है लेकिन वह व्यक्ति ही नहीं परमेश्वर भी है।
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पवित्र आत्मा परमेश्वर है
संपूर्ण बाइबल से स्पष्ट होता है की पवित्र आत्मा स्वयं परमेश्वर है। बाइबल में पवित्र आत्मा के जो गुण बताए गए हैं उसे साबित होता है की ये गुण परमेश्वर के है।
वह शाश्वत : इसका मतलब यह है कि ऐसा कोई समय नहीं जो वह ना हो-
” तो मसीह का लोहू जिस ने अपने आप को सनातन आत्मा के द्वारा परमेश्वर के साम्हने निर्दोष चढ़ाया, तुम्हारे विवेक को मरे हुए कामों से क्यों न शुद्ध करेगा, ताकि तुम जीवते परमेश्वर की सेवा करो। “ ( इब्रानियों 9:14 )
वह सर्वशक्तिमान है –
” स्वर्गदूत ने उस को उत्तर दिया; कि पवित्र आत्मा तुझ पर उतरेगा, और परमप्रधान की सामर्थ तुझ पर छाया करेगी इसलिये वह पवित्र जो उत्पन्न होनेवाला है, परमेश्वर का पुत्र कहलाएगा। “ ( लूका 1:35 )
वह सर्वव्यापी है –
” मैं तेरे आत्मा से भाग कर किधर जाऊं? वा तेरे साम्हने से किधर भागूं? “ ( भजन संहिता 139:7 )
वह सर्वज्ञ है –
” परन्तु परमेश्वर ने उन को अपने आत्मा के द्वारा हम पर प्रगट किया; क्योंकि आत्मा सब बातें, वरन परमेश्वर की गूढ़ बातें भी जांचता है। मनुष्य में से कौन किसी मनुष्य की बातें जानता है, केवल मनुष्य की आत्मा जो उस में है? वैसे ही परमेश्वर की बातें भी कोई नहीं जानता, केवल परमेश्वर का आत्मा। “ ( 1 कुरिन्थियों 2:10-11 )
पवित्र आत्मा को परमेश्वर कहा गया है –
” परन्तु पतरस ने कहा; हे हनन्याह! शैतान ने तेरे मन में यह बात क्यों डाली है कि तू पवित्र आत्मा से झूठ बोले, और भूमि के दाम में से कुछ रख छोड़े? जब तक वह तेरे पास रही, क्या तेरी न थी? और जब बिक गई तो क्या तेरे वश में न थी? तू ने यह बात अपने मन में क्यों विचारी? तू मनुष्यों से नहीं, परन्तु परमेश्वर से झूठ बोला। “ ( प्रेरितों के काम 5:3-4 )
वह सृष्टिकर्ता है –
” और पृथ्वी बेडौल और सुनसान पड़ी थी; और गहरे जल के ऊपर अन्धियारा था: तथा परमेश्वर का आत्मा जल के ऊपर मण्डलाता था। “ ( उत्पत्ति 1:2 )
फिर भी उत्पति 1:1कहता है –
” आदि में परमेश्वर ने आकाश और पृथ्वी की सृष्टि की। ” (उत्पति 1:1)
और कुलुस्सियों की पत्री के पहले अध्याय में पौलुस लिखता है –
” क्योंकि उसी में सारी वस्तुओं की सृष्टि हुई, स्वर्ग की हो अथवा पृथ्वी की, देखी या अनदेखी, क्या सिंहासन, क्या प्रभुतांए, क्या प्रधानताएं, क्या अधिकार, सारी वस्तुएं उसी के द्वारा और उसी के लिये सृजी गई हैं। और वही सब वस्तुओं में प्रथम है, और सब वस्तुएं उसी में स्थिर रहती हैं। ” ( कुलुस्सियों 1:16-17 )
इस तरह से हम देख सकते है की पिता परमेश्वर, पुत्र परमेश्वर और पवित्र आत्मा परमेश्वर सृष्टि की रचना कर रहे थे।
त्रिएकत्व
प्रभु ने मानवजाति के सामने स्वयं को तीन विभिन्न रुपों में प्रगट किया। परन्तु ये तीनों विभिन्न रूप जो प्रगट किए गए भिन्न परमेश्वर नहीं है परन्तु एक ही , एकमात्र परमेश्वर जिसने स्वयं को तीन विभिन्न रुपों में प्रगट किया। बाइबल का निम्न पद इसे स्पष्ट करता है –
“और गवाही देने वाले तीन हैं; आत्मा, और पानी, और लोहू; और तीनों एक ही बात पर सहमत हैं। – ठीक जैसे स्वर्ग में तीन साक्षी देनेवाले है, पिता, वचन और पवित्र आत्मा और ये तीनों एक है। “ ( 1 यूहन्ना 5:8 )
हम उत्पति में भी देखते हैं की परमेश्वर अपने स्वरूप बनाने की बात कर रहा है इस में वहां पर बहुत वचन शब्द आया है
” फिर परमेश्वर ने कहा, हम मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार अपनी समानता में बनाएं; और वे समुद्र की मछलियों, और आकाश के पक्षियों, और घरेलू पशुओं, और सारी पृथ्वी पर, और सब रेंगने वाले जन्तुओं पर जो पृथ्वी पर रेंगते हैं, अधिकार रखें। “ ( उत्पति 1:26 )
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प्रभु यीशु मसीह के स्वर्गारोहण से पहले उन्होंने अपने अनुयायियों को आज्ञा दी
” इसलिये तुम जाकर सब जातियों के लोगों को चेला बनाओ और उन्हें पिता और पुत्र और पवित्रआत्मा के नाम से बपतिस्मा दो। और उन्हें सब बातें जो मैं ने तुम्हें आज्ञा दी है, मानना सिखाओ: और देखो, मैं जगत के अन्त तक सदैव तुम्हारे संग हूं॥ “ ( मत्ती 28:19-20 )
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